‘सर’ और ‘इट्स ओके’ के बीच मौजूद दीवार के भीतर की एक सुंदर और मीठी सी प्रेम कहानी

‘सर’ दो लोगों से अधिक कुछ शब्दों और इससे अधिक मौन की कहानी है. इनमें पहला शब्द है- सर. और इसके जवाब में कहे गए दो शब्द ‘इट्स ओके’. इन्हें बोलने वाले दो किरदार यानी रत्ना (तिलोत्मा सोम) और अश्विन (विवेक गोम्बर) केवल अलग-अलग व्यक्तित्व के ही नहीं हैं, बल्कि इनकी सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि भी दो विपरीत ध्रुवों की तरह हैं, जो इनके बीच एक दीवार की तरह मौजूद है. लेकिन इसके भीतर ही हम एक सुंदर और मीठी सी प्रेम कहानी को पनपते हुए देख पाते हैं.

कहानी

महाराष्ट्र की एक गांव में रहने वाली रत्ना मुंबई में घरेलू नौकरानी का काम करती हैं. इससे पहले शादी के चंद महीने बाद ही वे विधवा हो गई थीं. जिस घर में रत्ना काम करती हैं, उसमें अश्विन अकेले रहते हैं. उनकी शादी टूट चुकी है. इससे पहले वे न्यूयार्क बतौर लेखक उनकी पहचान थी. लेकिन मुंबई में फैमिली बिजनेस के नीचे उनके लिखने का काम कहीं दब सा जाता है.

लेकिन रत्ना अपनी कहानी बताकर उन्हें एक सीख दे जाती है कि जिंदगी कभी खत्म नहीं होती. बचपन से रत्ना का सपना रहता है कि वह फैशन डिजाइनर बनेगीं. इस सपने को वह अश्विन के बड़े से घर के एक कोने में जिंदा भी रखती हैं. रत्ना की गैर-मौजूदगी में इस कोने को देखने पर अश्विन रत्ना की ओर आकर्षित होते हैं. इसके बाद अश्विन शब्दों के साथ शरीर से भी रत्ना के अधिक करीब आते जाते हैं. वे रत्ना की मदद भी करते हैं, लेकिन इस मदद में एहसान का नहीं बल्कि प्रेम का भाव होता है. लेकिन ‘इज लव इनफ?’ (Is love enough?) का सवाल दोनों किरदारों के सामने आता रहता है और इसके जवाब में दोनों खुद को अपनी-अपनी सीमाओं में बंधा हुआ पाते हैं, जिसे आखिर में रत्ना सर की जगह अश्विन कहकर तोड़ती हैं.

इस फिल्म की लेखिका रोहेना ने रत्ना के रूप एक मजबूत किरदार गढ़ा है. लोगों की बातों की परवाह न कर अश्विन के साथ अकेले घर में रहने वाली रत्ना उसके साथ बाहर घूमने जाने से इनकार कर देती हैं. रत्ना कहती हैं कि वह अश्विन की रखैल बनकर नहीं रहना चाहतीं.

रत्ना अश्विन से कहती हैं कि विधवा होने के बाद उन्हें इसलिए मुंबई भेज दिया गया कि उनके घरवालों के सिर बोझ हटे और फिर वे चार हजार रूपये महीना भी घर भेजती हैं. ऐसी स्थिति में अगर अश्विन के साथ उसके रिश्ते की बात परिवार को मालूम होने पर उसे फिर से वापस गांव जाना पड़ेगा. और वह ये नहीं चाहतीं.

इसके बाद अश्विन उसके साथ शादी की भी बात करते हैं, लेकिन रत्ना अपनी दायरे को जानते हुए इससे इनकार कर अश्विन का घर छोड़ देती हैं. वहीं, अश्विन भी अपनी सीमाओं को जानते हुए रत्ना को रोकने की कोशिश नहीं करते हैं और उसे जाने देते हैं. फिल्म के आखिर में रत्ना का फैशन डिजाइनर का सपना पूरा होता है लेकिन जब वह इसके बारे में बताने के लिए अश्विन के घर पहुंचती हैं, तो दरवाजे पर ताला लटका होता है.

अभिनय और संवाद

इस फिल्म का सबसे मजबूत पक्ष इसकी मौन और कुछ शब्दों के संवाद के साथ किरदारों के प्रभावशाली शारीरिक हाव-भाव हैं. तिलोत्मा और विवेक ने जिस तरह अपनी-अपनी भूमिकाओं को निभाया है, उससे रोहेना गेरा को फिल्म में काफी कम शब्द खर्च करने पड़े हैं. जितने शब्द खर्च भी हुए हैं, उनका काफी अधिक प्रभाव दिखता है. अश्विन के रूप में विवेक ने काफी सधा हुआ अभिनय किया है. वहीं, तिलोत्मा ने अपने अभिनय से रत्ना के साथ अन्याय नहीं होने दिया.

बतौर निर्देशिका ‘सर’  रोहेना गेरा की पहली फीचर फिल्म है. 160 मिनट की इस फिल्म के लिए भारत के दर्शकों को लंबा इंतजार करना पड़ा है. इस फिल्म को सबसे पहले 14 मई, 2018 को 71वें कान्स फिल्म महोत्सव में दिखाया गया था. भारत के सिनेमाघरों में इसे 13 नवंबर, 2020 को रिलीज किया गया था. अब आप इस फिल्म को पॉपकॉर्न नहीं बल्कि, धैर्य और प्रेम के साथ नेटफ्लिक्स पर भी देख सकते हैं.

मुख्य भूमिका : तिलोत्मा सोम और विवेक गोम्बर

निदेशिका और लेखिका : रोहेना गेरा

 

Right now I am working as an Independent Journalist & Writer. Prior to this, I worked as a Reporter in Satyagrah.scroll.in and for CNBC. Along with politics, I have been writing on social and other issues including economy. I am interested in ground report.